Khargosh ki kahani

तीन खरगोश और शेर की कहानी (Teen khargosh ki kahani)

तीन खरगोश और शेर की कहानी

Teen khargosh ki kahani


तो समस्या यह थी कि, एक खरगोश मां ने अपने तीन प्यारे बच्चो से कह दिया कि “अब से तुम्हें अकेले रहना होगा, ताकि तुम मेरे बिना भी अपने बल पर इस जंगल में अपना नाम कमा सको, ठीक है?”

और जैसे ही छोटे खरगोश अपनी मां के बंगले से बाहर जाने लगे तो उनकी मां ने एक आखरी सलाह दी-

याद रखना, तुम जो कुछ भी करों, उसे उतना अच्छी तरीके से करना जितना कि तुम कर सकते हों। क्योंकि यहीं तरीका इस दुनिया में काम करने का सबसे अच्छा तरीका है,शायद।

अब कहानी को आगे बढ़ाते है-

तीनों खरगोश भाइयो ने घर छोड़ने के बाद अपना अपना एक खुद का घर बनाने का फैसला किया, ताकि धूप, ठंड और बारिश से बचा जा सकें।

तो अब, पहला वाला खरगोश जो है वह बिल्कुल मेरी तरह आलसी था इसलिए उसने घास के भूसे से घर बनाया, जिससे उसे टाइम भी कम लगा और मेहनत भी कम करनी पड़ी। और फिर वह बाहर मजे से खेलने कूदने लगा।

अब दूसरा वाला खरगोश जो है वह मेरे बड़े भाई की तरह मुझसे थोड़ा कम आलसी था पर अलसी तो था। इसीलिये उसने अपना घर लकड़ियों से बनाया, जो कि पहले खरगोश के घर के मुकाबले थोड़ा ज्यादा मजबूत था। पर उसे भी घर बनाने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी और ज्यादा समय भी नहीं लगा। और वह भी अपने बड़े भाई के साथ जाकर खेलने कूदने लगा।

अब बारी आती है तीसरे वाले खरगोश की, तो यह तीसरा वाला खरगोश जो है वह उस महापुरुष की तरह था जो आजकल के जमाने में दिखाई नही देते। इसीलिये उसने अपना घर ईंट और सीमेंट से बनाया। घर के अंदर खाना पकाने के लिए उसने एक चूल्हा भी बनाया, और चूल्हें से निकले हुए धुँए को बाहर निकालने के लीये छत में एक चिमनी भी बनाई (लगता है इसवाले खरगोश ने सिविल इंजीनिरिंग की थी, वरना जंगल में सीमेंट कहा से मिलती)

पर सबसे छोटे वाले खरगोश को घर बनाने में सबसे ज्यादा समय लगा और मेहनत भी ज्यादा हुई। और इसलिये उसे ना खेलने का टाइम मिला और ना ही कूदने का। बेचारा इंजीनियर कही का।

कछुआ और खरगोश – वो कहानी जो आपने नहीं सुनी!

अब होती है खरगोश की कहानी में शेर कि एंट्री-

एक रात रावन जैसा एक शेर , कि जिसे ख़रगोश खाना बहोत पसंद था, वह बड़े वाले खरगोश के भूसे के आलीशान घर के पास से गुजरा, उसने खरगोश को घर में देख लिया, तो होना क्या था?

शेर के मन में लड्डू फूटा।

उसने घर के पास जा कर दरवाजा खटखटाया और कहा “छोटे खरगोश, अरे ओ छोटे खरगोश मुझे जरा अंदर तो आने दो प्लीज! और अगर तुम ऐसा नहीं करोगे तो मैं गुस्सा हो जाऊंगा और तुम्हारे घर को कुचल दूंगा।”

तो खरगोश बोला- ” चाहे मेरी जान भी क्यों न चली जाये पर मैं तुम्हें अपने प्यारे से घर में नहीं आने दूंगा, चल बक यहां से।”

फिर शेर गुस्सा हुआ और खरगोश के घर को खोदने लगा, और कुछ ही मिनटों में घर को गिरा दिया। अब खरगोश डर गया, इसलिए वह बिना जूते पहने ऐसे भागा जैसे मिल्खासिंघ पाकिस्तान छोड़ते वक़्त भागे थे।

खरगोश भागता हुआ दूसरे वाले खरगोश के घर के पास पहुंचा, और झट से घर में घुस गया और दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर उसने अपने भाई को सारी बात बताई। और दोनों खरगोश अच्छे दिन आने का इंतजार करने लगे, पर हाय रे फूटी किस्मत! उनके नसीब में ऐसा था नहीं।

अब शेर भी पीछे हटने वाला तो था नहीं, तो वो भी चल पड़ा पहले वाले खरगोश के पीछे- पीछे। और उसने खरगोश को अपने भाई के घर में घुसते देख लिया।

शेर धीरे से दरवाजे के पास जा कर उनकी बातें सुनने लगा, इससे उसे यह भी पता चल गया कि घर में एक नहीं बल्कि दो-दो खरगोश है, तो होना क्या था?

शेर के मन में दूसरा लड्डू फूटा।

उसने फिर वहीं अपना पुराना डायलॉग बोला- छोटे खरगोश, अरे ओ दूसरे वाले छोटे खरगोश मुझे जरा अंदर तो आने दो प्लीज! और अगर तुम ऐसा नहीं करोगे तो मैं गुस्सा हो जाऊंगा और तुम्हारे घर को कुचल कर राख कर दूंगा।”

तो उसके जवाब में दूसरा वाला खरगोश बोला (क्योंकि बडे वाले की बोलती तो ऐसे बंद हो गयी थी जैसी की इनफिनिटी वॉर मे हल्क की हो गयी थी)- चाहे हमारी जान भी क्यों न चली जाये पर हम तुम्हें हमारे प्यारे से घर में नहीं आने देंगे, चल बक यहां से।”

तो अब शेर फिर से गुस्सा हो गया और घर को खोदने लगा, और कुछ ही घंटों में घर को गिरा दिया, फिर क्या?

इस बार मिल्खासिंघ के साथ उसैन बोल्ट भी भागने लगा। और दोनों जा कर अपने छोटे भाई के घर मे जा कर छुप गये। और अंदर जाकर उस को पूरी कहानी सुना डाली।

शेर ने भी बिल्कुल CID वालों की तरह उन दोनों का पीछा किया।

शेर था तो शेर ही, पर फिर भी उसकी नजर एक बाज की तरह थी। क्योंकि उसने इस बार भी दोनों को अपने तीसरे भाई के घर में जाते देख लिया।

और यह भी पता कर लिया कि घर में अब दो नहीं बल्कि तीन-तीन खरगोश है, तो होना क्या था?

नही नही नही। इस बार शेर के मन में लड्डू नहीं फूटा! पता है क्यों? क्योंकि उस एड में सिर्फ दो ही लड्डू की बात हुई थी ना।

शेर ने घर की डोर-बेल बजाई और फिर अपना पुराना डायलॉग बोला- छोटे खरगोश, अरे ओ दूसरे और तीसरे वाले छोटे खरगोश मुझे जरा अंदर तो आने दो प्लीज! और अगर तुम ऐसा नहीं करोगे तो मैं गुस्सा हो जाऊंगा और तुम्हारे घर को कुचल कर राख कर दूंगा।”

यह सुनकर सबसे छोटा खरगोश बोला- “चाहे हमारी जान भी क्यों न चली जाये पर हम तुम्हें अपने इस अदभुत घर में नहीं आने देंगे, चल बक यहां से।

फिर शेर अपनी आदत से मजबूर गुस्सा हुआ और घर को खोदने लगा, पुरा एक दिन निकल गया पर घर को एक खरोंच भी नहीं आयी। शायद सीमेंट अंबुजा वालो की होगी।

फिर शेर ने मिन्टोफ्रेश खाई और उसके दिमाग की बत्ती जल गयी और वह छत पर चढ़ गया।

और अब डरने की बारी तीनों खरगोश की थी। पर तभी छोटे वाले खरगोश ने अपने फ्रिज में से एक “mountain dew” की बोत्तल निकाली और पी गया, पर फिर भी उसका डर नही गया।

फिर उसने चूल्हें के ऊपर एक बड़ा सा बर्तन रखा और उसे पानी से भर कर चूल्हा चालू कर दिया। और उस बर्तन पर ढक्कन रख दिया।

शेर ने ऊपर जाकर चिमनी के अंदर देखा तो उसे सिर्फ ढक्कन ही नजर आया, जलता हुआ चूल्हा नहीं, इसलिए वह बिना सोचे-समझे चिमनी के अंदर कूद गया।

और तभी हमारे हीरो ने वह ढक्कन हटा दिया, और शेर सीधा उबले हुए पानी में गिरा और ठंड से मर गया।

और यह देख कर तीनो खरगोश भाइयों ने जश्न मनाया, और “डीजे वाले बाबू, मेरा गाना बजा दों” पर डांस भी किया।

पर इस बड़ी और लंबी खरगोश की कहानी से हमें सबक क्या मिलता है?

1. आलसी लोग कम काम करके फटाफट मजे लेने के बारे में सोचते है, पर मेहनती लोग बहुत ज्यादा मेहनत करके ईंट का मकान बनाते है ताकि मुसीबत आने पर भी वह टिक सकें


2. कभी भी जिंदिगी में quick fix (तुरत -फुरत उपाय) के पीछे मत भागिये, यह आपको मुसीबत में डाल सकता है।

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उम्मीद है आपको यह khargosh aur sher ki kahani पसंद आई होगी।

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