तैसे को जैसा।

दोस्तों, क्या आपने वह कहावत सुनी है?

“जैसे को तैसा।”

आज हम एक मानव व्यवहार के फंडे के बारे में बात करेंगे, जिसका शीर्ष है

“तैसे को जैसा।”

सामान्य तौर पर हर आदमी चाहे वह कोई भी क्यों न हो, सबमें एक आदत होती है-जैसे को तैसा की आदत।

“यानी कि हम सब लोग सभी के साथ ऐसा बर्ताव करते है जैसा कि वह हमारे साथ करते है।”

कोई हमारे साथ प्यार से बात करता है तो हम भी उनके साथ प्यार से बात करते है, अगर कोई हमारे साथ दुर्व्यवहार करता है तो हम भी उनसे दुर्व्यवहार ही करते है।

पर दोस्तों,ये तो सिक्के का सिर्फ एक ही पहलू था, पर क्या आपने कभी इस मानव व्यवहार को किसी दूसरे नजरिये से देखा है?

दूसरा पहलू:

दूसरा पहलू यह है कि “हर इंसान आप के साथ ठीक ऐसा ही बर्ताव करेगा जैसा कि आप उनके साथ करोगे।

इसका मतलब है कि अगर आप किसी इंसान को हसाओगे तो वह आपको भी हंसाएगा। अगर आप उसे गाली दोगे तो वो भी आपको…

तो होता क्या है कि आप किसी आदमी को मिलते है-

1. फर्स्ट इम्प्रेसन-

जब आप किसी आदमी को मिलते है तो वह अपने निजी अनुभव या फिर पूर्वधारणा से आपके चरित्र के बारे में अनुमान लगाता है कि आप कैसे इंसान है अच्छे या बुरे, बोरिंग या इंटरस्टिंग वगैरह।

फिर वह आपके साथ अपने अनुमान के हिसाब से बर्ताव करना शुरू करता है, यानी कि अगर सामने वाले ने आपको अच्छा आदमी मान लिया है तो वह आपके साथ अच्छा बर्ताव करेगा, और अगर उसने आपको बुरा आदमी समज लिया है तो वह आपके साथ दुर्व्यवहार करने लगता है।

2. अब आती है “जैसे को तैसा” की बारी-

अब जैसे ही सामने वाला आपके साथ प्यार से बात करेगा तो आप भी उनके साथ प्यार से बात करेंगे, पर अगर उसने आपको बुरा आदमी समज लिया है तो वह आपके साथ शायद दुर्व्यवहार करेगा, और फिर आप भी उसके साथ दुर्व्यवहार करेंगे। क्योंकि हर इंसान की तरह आपमें भी “जैसे को तैसा” का व्यवहार करने की आदत होती है।

और जब आप उसके साथ बुरा बर्ताव करोगे, तो उसे अपनी पूर्वधारणा को सच मानने के लिये सबूत मिल जाएगा। और वह आपके साथ फिर से बुरा बर्तव करेगा,और यह सिलसिला हमेशा के लिये चलता रहेगा।

दोस्तों, मैंने अपने अनुभव से दूसरों के साथ व्यवहार करने का इससे ज्यादा असरकारक तरीका सीखा है। और वह है-

3. तैसे को जैसा-

दूसरो के साथ बर्ताव करने का बेहतरीन फंडा जो कि मैंने सीखा, वह यह है की आप

” सामने वाले से ऐसा बर्ताव मत करिये जैसा की वह आपके साथ करता है, बल्कि ऐसा बर्ताव करिये जैसा आप चाहते है कि वह आपके साथ करें।”

तो दोस्तों इसमें करना क्या होता है, की जब भी कभी कोई आपके साथ दुर्व्यवहार करें तो आप अपनी पुरानी आदत “जैसे को तैसा” के विपरीत जा कर उनसे दुर्व्यवहार करने की बजाय उनसे अच्छा व्यवहार करें।

अब वह आदमी फिर दुबारा आपके साथ बुरा बर्ताव करेगा। मगर इस बार भी आपको उसके साथ अच्छा बर्ताव करना पड़ेगा।

और आपको इस क्रिया को बार बार दोहराना पड़ेगा।

पर क्यों?

क्यों आपको सामने वाले से अच्छा व्यवहार करना चाहिये जबकि वह आपके साथ बुरा बर्ताव करता है।

जवाब है- क्योंकि आखिरकार सामने वाला भी तो एक इंसान है और उसमें भी हर इंसान की तरह “जैसे को तैसा” का बर्ताव करने की आदत होगी।

और अगर आप उसके साथ लगातार अच्छा बर्ताव करते रहेंगे तो उसको भी आपके साथ अच्छा ही बर्ताव करना पड़ेगा क्योंकि उस इंसान में भी “जैसे को तैसा” का व्यवहार करने की आदत होगी।

और तो और उसके साथ लगातार अच्छा व्यवहार करने से उस इंसान को भी धीरे धीरे यह अहसास होने लगेगा कि आप एक अच्छे इंसान है और फिर उसकी आपके बारें में गलत पूर्वधारणा खत्म हो जायेगी और वह भी आपके साथ अच्छा बर्ताव करने लगेगा।

और आप इसी तरह “तैसे को जैसा” तकनीक का प्रयोग करके किसी भी इंसान की आपके बारेमें पूर्वधारणा बदल सकते है।

मैं अपनी जिंदगी का एक real example देता हूं कि मैंने कैसे इस तकनीक का प्रयोग किया, और इसका फल मुझे क्या मिला-

यह उस वक़्त की बात है, जब एक कंपनी में मेरी नई नई जॉब लगी थी। शायद एक हप्ता भी पूरा नही हुआ था,

एक दिन tea break के दौरान मैं एक कुरसी पर बैठा हुआ था और तभी एक ऑपरेटर ने मेरे पास आकर मुझे बोला कि “सर, थोड़ी देर के लिये कुरसी से खड़े हो जाइये।”

तो मुझे लगा कि शायद उसको कोई काम होगा इसीलिये मैं वहां से खड़ा हो गया,

तो फिर उसके बाद वह ऑपरेटर उस कुरसी पर बैठ गया,और मैं उसे बस देखता रह गया। मन में गुस्सा तो बहुत आया, पर फिर भी मैं कुछ बोला नहीं, क्योंकि मुझे पहले से ही अंदाजा था कि नई जॉब में कोई न कोई तो मेरे साथ बुरा बर्ताव जरूर करेगा।

इसलिए मैंने पहले से तय कर लिया था कि मैं अपने “तैसे को जैसा” के फंडे का प्रयोग करूंगा।

उस घटना के बाद दिन बीतते गये, और उस ऑपरेटर से जब भी मेरी मुलाकात होती तो वह मुझसे उसी तरह का बुरा बर्ताव करता रहता। (दरअसल पूरे शॉप में वह आदमी अपने बुरे बर्ताव के लिये बदनाम था), पर मैंने उस ऑपरेटर के साथ अपना अच्छा बर्ताव जारी रखा,

तो क्या मुझे उस “तैसे को जैसा” रिजल्ट मिला?

जी हां दोस्तों, कुछ महीने बीतने के बाद उसे भी यह अहसास हो गया कि मैं वाकई में एक अच्छा इंसान हूं, और फिर धीरे धीरे वह भी मेरे साथ अच्छा व्यवहार करने लगा।

इतना अच्छा व्यवहार, की एक दिन शॉप में किसी का जन्मदिन था तो सबके लिये कोल्ड- ड्रिंक मंगवाई गई थी। मैं उस वक़्त उस जगह से थोड़ा दूर काम कर रहा था।

तो वह ऑपरेटर खुद मुझे कोल्ड-ड्रिंक का ग्लास देने आया।

तो दोस्तों, आपको क्या लगता है? अगर मैं उसके साथ बुरा बर्ताव करता, तो क्या आज वह मेरा दोस्त होता?

जवाब है नहीं, मुझे पक्का यकीन है कि उसकी और मेरी दोस्ती कभी नहीं होती।

HindiMonk.com पर आने के लिये शुक्रिया।

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