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टॉयलेट- एक समस्या। A short moral story on leadership in Hindi

एक कार मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में साप्ताहिक बैठक के दौरान एक कार्यकर्ता ने एक बदबूदार मुद्दा उठाया-

उसने कहा कि श्रमिकों के लिए शौचालय बहुत गंदे रहते है, उसकी स्वच्छता में सुधार करने की आवश्यकता है। हालांकि, मैनेजर्स के शौचालयों की सफाई और स्वच्छता हमेशा बहुत अच्छी होती है।

कंपनी के चेयरमैन ने अपने जिम्मेदार कार्यकर से पूछा कि उसे इस समस्या को दूर करने में कितना समय चाहिए।

कार्यकर ने इसे सही करने के लिए एक महीने का समय मांगा।

उसकी बात सुनकर चेयरमैन बोल पड़े-

“मैं इसे एक दिन में कर दूंगा, तुम बस कल एक सफाई कर्मचारी को मेरे पास भेज देना।”

अगले दिन, जब सफाई कर्मचारी उनके पास गया तो चेयरमैन ने उसको दोनों शौचालयों के बाहर चिपकी हुई तख्तियों की अदला बदली करने का आदेश दे दिया।

श्रमिकों के शौचालय पर मैनेजर्स का साइन बोर्ड लगाया गया और मैनेजर्स के शौचालय पर श्रमिक का साइन बोर्ड।

चेयरमैन ने फिर हर हफ़्ते के अंत में इसे बदलते रहने का निर्देश दे दिया।

तीन दिन के भीतर ही शौचालय की स्वच्छता की समस्या सुलझ गई।

एक समाधान जो तत्काल हुआ और स्थायी भी।

Moral of the story

  1. एक नेता के रूप में, यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप न सिर्फ समस्या को धैर्य-पूर्वक सुनें बल्कि समाधान को जल्दी से कार्यान्वित भी करें।
  2. समस्या को हल करने के लिए हमेशा नए तरीकों को ढूंढते रहें। जैसे ही आप चीजों को अलग तरीके से करने के लिए अपना दिमाग खोलते हैं, मौके के दरवाजे व्यावहारिक रूप से आपके लिए खुल जाते हैं।
  3. जिस क्षण आप इस मानसिकता को अपना लेंगे, आपका मार्ग सामान्य नेतृत्व से एक महान नेतृत्व में बदल जाएगा।

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