छोटे बालक की शिक्षाप्रद कहानी।

कैसे हराया नन्हे बालक ने विशाल दानव को? | शिक्षाप्रद कहानी इन हिंदी

हम सब की जिंदगी में कुछ लोग ऐसे होते है जिनके साथ हमारी बिलकुल नही बनती। कुछ लोग, जिन्हें देख कर हम सोचते है- “अरे यार, ये कहा से आ गया।” उनके साथ शुरू की गई हर एक बातचीत दो मिनट के अंदर ही बहस में तब्दील हो जाती है।

कुछ लोग जिन्हें देख कर मर्डर करने वाली फिलिंग आ जाती है।

लेकिन हम कभी ऐसा करते नहीं है, क्योंकि भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत अगर हम हत्या के दोषी पाए जाते है, तो फिर ऐसे में हमें सज़ा-ए-मौत या फिर उम्रकैद की सजा दी जा सकती है।

आज की यह पोस्ट उन लोगों के लिए है जो ऐसे जहरीले इंसानों का कत्ल करना चाहते है; बिना अपनी लाठी को तोड़े।

कैसे हराया नन्हे बालक ने विशाल दानव को?

शिक्षाप्रद कहानी इन हिंदी

सदियों पुरानी बात है, उत्तर भारत के कल्पी राज्य में माधवपुर नाम का एक छोटा सा गांव था। जो पूरे राज्य में एक अनोखी चीज़ की वजह से बदनाम था।

दरअसल, गांव के पूरब में एक जंगल था, जिसमें एक बहुत भयंकर दिखने वाला मायावी दानव रहता था। सिर्फ माधवपुर के लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के गांव वाले भी उस दानव से बहुत डरते थे। और वे लोग कभी भी उसकी गुफा की तरफ नही जाते थे।

उसे मारने की कोशिश में अब तक कई लोगों ने अपनी जान से हाथ गंवा चुके थे। जिसके बारे में बहुत सी कहानियां प्रचलित थी,

जैसे कि एक बार एक आदमी ने उस पर बड़ी सी तलवार से हमला किया, पर उस मायावी दानव ने तलवार गायब कर दी और एकदम जादुई तरीके से एक और तलवार निकाल ली जो उस तलवार से दुगनी बड़ी और पैनी थी ओर उस आदमी के दो टुकड़े कर दिए ।

उसके बाद, एक गाँववासी ने दानव की गुफा को आग लगा दी, लेकिन फिर भी दानव को उसका कुछ भी असर नही हुआ बल्कि उसने गुफा से बाहर आकर उस इंसान को ही आग में भून डाला।

इन घटनाओं से आतंकित, गांववासियों ने दानव की गुफ़ा के नजदीक जाना छोड़ दिया। वे ये मानने लगे कि यही उनकी किस्मत है और उन्हें इसी के साथ जीना सीखना होगा।

फिर एक दिन, एक छोटे से लड़के ने कहा कि उसने दानव को पराजित कर दिया है। पर गांव वालों ने उसकी बात पर विश्वास नही किया। लड़के ने कहा अगर आप को मुझ पर विश्वास नही है तो मेरे साथ चलकर खुद क्यों नही देख लेते।

लोगों को यह सुनकर आश्चर्य हुआ, पर तस्सली के लिए वे उस छोटे लड़के के साथ गए कि आखिर कैसे उसने दानव को परास्त कर दिया।

जैसे ही गांव वालों ने उस विशालकाय दैत्य को देखा, दानव ने अपने नथुनों को फैलाया और उन लोगों पर उग्र दृष्टि डाली। लोग डर गए।

पर उस लड़के ने अपनी जेब से एक सेब निकाला और उसे दानव को दिया। दानव ने उसे छीन कर अपने मुंह में डाल लिया और अपनी बंद मुट्ठी लड़के के आगे कर दी। जब धीरे–धीरे मुट्ठी खुली तो लोग यह देख कर हैरान रह गए कि उसमें दो स्वादिष्ट सेब थे। लड़के ने जैसा सेब उसे दिया था, उससे दुगुने लाल और दुगुने बड़े।

फिर लड़के ने पानी से भरा एक छोटा–सा मिट्टी का बर्तन बाहर निकाला और उसे दानव को दिया। उसने उसे ले लिया और बदले में लड़के के सामने स्वर्ण से बने दो बर्तन रख दिए जिनमें स्वादिष्ट रस भरा हुआ था।

वह लड़का मुस्कुराया। और बदले में वह दैत्य भी मुस्कुराया।

लोग यह देख आनंदित हो गए। अचानक उन्हें एहसास हुआ कि दानव गांव के लिए शाप नहीं, वरदान है।

Moral of the story:

हालांकि यह कहानी सदियों पुरानी है पर वह दानव आज भी मौजूद है, कॉलेजों में, ऑफिसों में और हमारे जीवन में।

क्या आप किसी इंसान को नफरत करते हैं क्योंकि वह आप से रूखा या अभद्र व्यवहार करता है? तो शायद आपको उस तरीके को बदलने की ज़रूरत है जिस तरह से आप उनसे व्यवहार करते हैं।

उसके बदलने का इंतज़ार न करें, पहले आपको बदलना होगा।

लोग हमसे बुरी तरह पेश आते हैं, क्योंकि हम उनसे बुरी तरह पेश आते है। अपने आप को बदल दे और फर्क महसूस करें!
इस बात को हमेशा याद रखें: आप जो देते हैं, आपको वही मिलता है। उससे दुगना!

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