राजा और ज्योतिष की मनोरंजक कहानी

राजा और ज्योतिष की कहानी। Manoranjak kahani in hindi

राजा और ज्योतिष। Raja ki manoranjak kahani in hindi

एक बार तक्षशिला के राजा भैरवसिंह को रात में एक सपना आया, की उनके सारे दांत तूट गये है।

तो दूसरे दिन राजा ने राज्य के एक ज्योतिष को बुलाया और उनसे अपने सपने की कहानी बताई और उसका अर्थ पूछा।

ज्योतिष बोले कि: हे राजन, यह सपना तो बहुत बुरे संकेत बताता है। इसका मतलब है कि तुम्हारे सारे प्रियजनों की मृत्यु हो जायेगी और तुम अकेले रह जाओगे।

अब राजा को यह सुनकर गुस्सा आया और बोला ” यह ज्योतिष तो पाखण्डी लगता है, एक सपने की वजह से मेरे सारे प्रियजन क्यों मरे भला?

और उसने अपने सिपाहियों को आदेश दिया कि “इस ज्योतिष को शूली पर चढ़ा कर फांसी दी जाए।”

फिर उसने अपने सेनापति को किसी दूसरे पढे लिखे ज्योतिष को बुलाने का आदेश दिया।

(अब आती है दूसरे ज्योतिष की एंट्री।)

दूसरे ज्योतिष ने भी आकर राजा की सपने की कहानी सुनी।

और फिर राजा ने उनसे भी सपने का अर्थघटन करने को बोला।

पर दूसरा वाला ज्योतिष ज्यादा सयाना था।उसने राजा से बोला कि ” हे राजन, यह तो बहुत ही अच्छी खबर है। इस सपने का अर्थ है कि तुम अपने बाकी सारे प्रियजनों से भी अधिक जियोगे।”

राजा यह बात सुनकर खुश हो गया, और अपने गले में से मोती की माला निकाल कर उस ज्योतिष को दी।

और यहां हमारी कहानी पूरी हुई।

तो दोस्तों, इस छोटी सी कहानी से क्या सबक मिलता है?

सबक यह है कि आप क्या बोलते है उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, फर्क तो इस बात से पड़ता है कि आप जो बोलते है वह कैसे बोलते है।

इस कहानी में पहले वाले ज्योतिष और दूसरे वाले ज्योतिष, दोनों ने एक ही बात कही थी कि राजा के सारे प्रियजन मर जायेंगे, पर दोनों का कहने का तरीका या फिर कहे तो शब्द अलग अलग थे। और उसी शब्दों की वजह से उन दोनों को विभिन्न प्रकार के फल मिलें।

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