पिंजरे में बंद तोता की कहानी

पिंजरे में बंद तोता और बेमिसाल उपदेश। Tota ki kahani se sikh

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पिंजरे में बंद तोता और बेमिसाल उपदेश

Tota ki kahani se sikh

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पहाड़ों में यात्रा करता हुआ एक युवक एक छोटे से हिल स्टेशन पर पहुंचा।

रात को आराम करने के लिए उसने एक अच्छे से मोटेल में एक कमरा किराए पर लिया। पर रात होने में अभी कुछ देर बाकी थी, इसलिए वह शहर घूमने बाहर निकल पड़ा।

चलते चलते वह घाटी के छोर तक आ गया। वहाँ उसने एक अजीब घटना देखी।

एक सुनहरे पिंजरे में एक खूबसूरत तोता बैठा था, जो लगातार “आज़ादी! आज़ादी!” पुकार रहा था।

और यह एक ऐसी जगह थी कि जब तोता “आज़ादी” शब्द दोहराता, तो शब्द घाटियों में गूँजने लगता था।

युवक ने सोचा: “मैंने अपनी जिंदगी में कई तोतों को पिंजरे में बंध देखा है, और मुझे हमेशा से लगता है कि उन्हें उन पिंजरों से मुक्त होना चाहिए …

लेकिन मैंने ऐसा तोता पहले कभी नहीं देखा है जो अपना पूरा दिन, सुबह से लेकर शाम तक आज़ादी शब्द चिल्लाने में बिताता हो।”

उसे एक विचार आया।

आधी रात को वह उठा और चोरी छुपे तोते के पास गया और पिंजरे का दरवाज़ा खोल दिया।

फिर तोते के कान में धीरे से फुसफुसाया, “अब निकल जाओ।”

लेकिन युवक को बहुत हैरानी हुई यह देखकर कि तोता पिंजरे से बाहर निकलने की बजाय पिंजरे की सलाख़ों को जकड़ रहा था।

उसने तोते से कहा, “क्या तुम आज़ादी के बारे में भूल गए? बस बाहर निकलो! दरवाज़ा खुला है और मालिक सो रहा है; किसी को पता नही चलेगा। तुम बस आकाश में उड़ जाओ; पूरा आसमान तुम्हारा है।

लेकिन तोता सलाख़ों को बहुत सख़्ती से जकड़े रहा।

आदमी ने कहा, “आखिर बात क्या है? क्या तुम पागल हो गए हो?”

उसने तोते को अपने हाथों से बाहर निकालने की कोशिश की, घबराया हुआ तोता उसे चोंच मारने लगा। और साथ ही उसने चिल्लाना शुरू कर दिया “स्वतंत्रता! स्वतंत्रता!”

और फिर से एक बार तोते की आवाज़ घाटियों में गूंजने लगी।

लेकिन युवक भी जिद्दी था;

उसने तोते को ज़बरदस्ती बाहर खींच लिया और आकाश में फेंक दिया; और फिर अपने कमरे में आकर बेड पर लेट गया।

वह बहुत संतुष्ट था, हालांकि उसके हाथ में चोट लगी थी लेकिन युवक बेहद ख़ुश था क्योंकि कि आज उसने एक आत्मा मुक्त कर दी थी। वह चैन की नींद सो गया।

अगले दिन जब सुबह हुई, युवक जागा और अपनी दिनचर्या निपटाने के बाद शहर की सैर करने निकल पड़ा।

रास्ते में उसे तोते की चिल्लाने की आवाज सुनाई दी, “स्वतंत्रता! स्वतंत्रता!”

उसने सोचा कि शायद तोता किसी पेड़ पर या फिर कोई ऊंची चट्टान पर बैठा होगा।

लेकिन जब वह घाटी के छोर पर पहुँचा, तो वह यह देख कर चौंक गया कि तोता अभी भी पिंजरे में बैठा था और दरवाज़ा खुला था।

कहानी से सबक:

1. हम सभी अपने जीवन में किसी ना किसी चीज को पाने की चाह रखते है। बिना यह समझे कि वह होती क्या है।

इसलिए जब हमें वह चीज मिल जाती है तो उसे छोड़ कर अपने comfort zone में वापिस आ जाते है।

हमें इस बात का पता ही नही चलता कि जो हमें चाहिए था वह हमें मिल गया है।


2. हर कोई कहता है कि उन्हें जिंदगी में सुकून चाहिए, खुशी चाहिए।

और जब उन्हें ख़ुशी या सुकून मिल जाता है तब भी वे उसी की चाहना करते रहते है; उसका आनंद नही लेते।

क्योंकि ज़्यादातर लोग इस बात को समझ ही नही पाते कि सुकून या फिर ख़ुशी का सही मायने में अर्थ होता क्या है।


3. हर कोई कहता है कि उन्हें तरक़्क़ी करने के लिए बस एक मौका चाहिए।

पर जब वह मौका उन्हें मिल जाता है तब वह उसे पहचान नही पाते।

उस मौके का सही उपयोग करने के बजाय वे वापिस अपने पिंजरे में आ जाते है।

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