Hindi Story On Hard Work

दो प्रेरणादायक कहानीयां, जो बदल देगी आपकी सोच। Hindi story on hard work

इस दुनिया में ऐसे बहुत सारे लोग ऐसे है जो यह मानते है कि इंसान अपनी किस्मत से ज्यादा कुछ नही पा सकता फिर चाहे वह कितनी भी मेहनत क्यों न करें।

सच कहूं तो मुझे नही पता कि इंसान की सफलता में किस्मत का हाथ कितना होता है। पर मैं हमेशा से कड़ी मेहनत में विश्वास करने वाला इंसान हूं, न कि किस्मत में। आप वही पाते है जो आप बोते है।

मैं वाकई में ऐसा मानता हूं कि अगर इंसान में अपनी परिस्थिति को बदलने की दृढ़ इच्छा हो तो वह अपनी किस्मत को बदल सकता है।

आज की यह दो कहानी भी मेरी उसी सोच का समर्थन करती है कि “अच्छी किस्मत तब बनती है जब तैयारी अवसर से मिलती है, जबकि खराब किस्मत तब बनती है जब तैयारी की कमी का सामना वास्तविकता से होता है।”

दो प्रेरणादायक कहानीयां, जो बदल देगी आपकी किस्मत।

Hindi story on hard work

सबसे अच्छे परिणाम उन्ही को मिलते है जो सबसे ज्यादा मेहनत करते है।

विद्या-रेखा:

An Inspirational Story In Hindi On Willpower

प्राचीन भारत में एक उत्सुक लड़का एक प्रतिष्ठित गुरु के पास गया। उसने गुरु से कहा कि वे उनके साथ रहकर विद्या हासिल करना चाहता है।

गुरु ने लड़के के दाँये हाथ को पकड़ा और उसकी हथेली को गौर से देखने लगे, थोड़ी देर बाद उन्होंने उस लड़के की आंखों में देखा और उससे कहा कि “क्षमा करना लेकिन मैं तुम्हें अपना शिष्य नही बना सकता।”

लड़के ने पूछा- “पर क्यों?”

गुरु ने कहा- “बेटे तुम्हारे हाथ में विद्या-रेखा दिखाई नही देती, इससे मालूम होता है कि तुम्हारी किस्मत में ज्ञान की कमी लिखी गई है, इसलिए तुमसे शिक्षा में उत्कृष्टता की उम्मीद नहीं की जा सकती।”

लेकिन लड़का गुरु की छत्रछाया में विद्या प्राप्त करने के लिए बहुत दृढ़ था। उसने गुरु से पूछा- “गुरुवर, क्या आप मुझे बता सकते है कि विद्या-रेखा किस जगह होती हैं?

गुरु ने लड़के के प्रति सहानुभूति दर्शाते हुए उसकी हथेली पर विद्या-रेखा का स्थान दिखाया। उसके बाद लड़का चला गया।

कुछ दिन बाद वह लड़का फिर से गुरु के पास आया और अपना दाँया हाथ आगे बढ़ाकर कहा- “देखिए अब तो मेरे हाथ में विद्या रेखा साफ दिखाई देती है, क्या अब आप मुझे शिक्षा देंगे?”

गुरु ने लड़के की हथेली में देखा और चौंक गए। उसमें एक नई लकीर थी, जिसे देखकर ऐसा लगता था मानो उस लड़के ने किसी धारदार चाकू से अपने हाथ को चिर कर एक नई लकीर खींच दी हो।

बुद्धिमान गुरु लड़के के दृढ़ संकल्प से प्रभावित हुए, उन्होंने लड़के के सिर को अपने हाथ से सहलाया और तुरंत उसे अपने छात्र के रूप में स्वीकार किया।

उसके बाद उस असाधारण लड़के ने खुद को शिक्षा पाने के लिए समर्पित कर दिया, और बड़ा हो कर एक विद्वान बन गया। उस लड़के का नाम पाणिनी था, जिन्होंने संस्कृत भाषा के व्याकरण को व्यवस्थित करके एक नया रूप दिया। उनकी उत्कृष्ट कृति ‘अष्टाध्याय’ नामक एक व्याकरण ग्रंथ है। जिसमें लिखे गए तार्किक नियमों और तकनीकों ने आधुनिक भाषा-विज्ञान को काफी प्रभावित किया है।

इस प्रकार पाणिनी ने एक चाकू से अपनी हथेली पर नकली विद्या-रेखा बनाकर अपने भाग्य को चुनौती दी और शिक्षा हासिल की।

Moral Of The Story:

एकमात्र अच्छी किस्मत जिसके साथ कई महान पुरुष जन्म लेते है, वह है अपनी बुरी किस्मत को दूर करने का दृढ़ संकल्प।

इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कि आपकी हथेली की रेखाएं क्या कहती है, फर्क तो इस बात से पड़ता है कि आप उसे स्वीकार करते है या फिर उसे बदलने की कोशिश।

मैथेमेटिक्स जीनियस रामानुजन की कहानी:

Short Story In Hindi On Hard Work

एक बार रामानुजन उनके एक करीबी दोस्त मिस्टर हार्डी के साथ बैठे बातचीत कर रहे थे, तब उसके दोस्त ने उनको कहा – “क्या तुम्हें पता है लोग तुम्हें भाग्यशाली मानते हैं?

रामानुजन: क्या? मैं और भाग्यशाली! जरा मेरी कोहनी को देखो, यह आपको मेरी कहानी बताएगी।

मिस्टर हार्डी: यह क्या है, रामानुजन? यह इतनी काली और रूखी क्यों हैं?

रामानुजन: मेरी कोहनी मुझे भाग्यशाली बनाने के चक्कर में काली और रूखी हो गई! बचपन में मैं दिन-रात स्लेट पर गणना करता था। और उसे पोछने के लिए कपड़ा ढूंढने में समय गंवाए बिना अपनी कोहनी से ही स्लेट को पोछ लिया करता था।

मिस्टर हार्डी ने पूछा- पर तुम कागज़ का इस्तेमाल क्यों नही करते थे?

रामानुजन: उस हिसाब से तो मुझे हर महीने कागज़ के चार बंडल की जरूरत पड़ती। और मिस्टर हार्डी, उस समय जब भोजन खुद ही एक समस्या थी, तो मैं कागज़ के लिए पैसे कहा से लाता?

Moral Of The Story:

भाग्य किसी को उपहार में नही मिलता, उसे पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। जितनी ज्यादा आप मेहनत करेंगे, उतने ज्यादा आप भाग्यशाली बनेंगे।

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