Emotional stories in hindi

बेटे का कर्ज। Best Heart touching short stories in hindi

बेटे का कर्ज।

An emotional story in hindi

अंजली किचन में खाना बना रही थी, जब उसका बारह साल का बेटा राहुल उसके पास आया। उसके बेटे ने अपनी मां के हाथ में एक पर्ची थमा दी। जो कि शायद उसने अपने हाथों से लिखी थी।

अंजली ने उसे खोल कर उसे पढ़ा, उसमें कुछ इस तरह लिखा हुआ था-

इस पूरे महीने के लिये मेरा रूम साफ करने के – 50 रुपये।

तुम्हारे लिये दुकान से सामान लाने का चार्ज- 10 रुपये।

जब तुम बाहर गयी थी तो छोटी बहन का ख्याल रखने का चार्ज- 30 रूपये।

Exam में अच्छे नंबर लाने के- 100 रुपये।

GST चार्ज: 10 रुपये

मेरे काम करने की कुल लागत है- 200 रुपये।

फिर राहुल अपनी मां को देखने लगा, शायद वह कुछ याद कर रही थी।

फिर अंजली ने अपने बेटे के हाथ से पेन ली और कागज़ के पीछे की तरफ कुछ लिखने लगी। और फिर थोड़ी देर बाद वह कागज़ अपने बेटे को दिया।

राहुल ने उसे पढ़ा तो उसमें कुछ ऐसा लिखा था।

9 महीने पेट में रखने का चार्ज – नि:शुल्क।

वह सभी रातें, जब मैं तुम्हारे लिये जगी, तुम्हारी देखभाल की और तुम्हारी अच्छी सेहत के लिये प्रार्थना की, उसका चार्ज- निशु:ल्क।

वह आंसू जो तुम्हारी चिंता में मेरी आंखों से निकले, उनका चार्ज- नि:शुल्क।

तुम्हें नये खिलौने और कपड़े ला देने के लिये, तुम्हें अपने हाथ से खाना खिलाने के लिये, और यहां तक कि तुम्हारी नाक मेरी साड़ी के पल्लू से पोंछने का चार्ज : नि:शुल्क।

तुमसे प्यार करने की मेरी कुल लागत है- नि:शुल्क।

जब राहुल ने कागज़ को पढ़ना खत्म किया तो उसकी छोटी-छोटी आंखों में बड़े-बड़े आँसू आ गये थे।

फिर उसने अपनी मां से पेन वापिस ले कर अपने लिखे हुऐ खत के नीचे बड़े अक्षरों में लिखा “तुम्हारा बेटा अपना भुगतान तुम्हारे बे-हिसाब प्यार के बदले में माफ करता है।


हेमु भाई गढवी की प्रेरणात्मक कहानी।

Inspirational story in hindi

यह 1961 की बात है। हेमु भाई गढ़वी शिहोर गांव से अपना संगीत कार्यक्रम पूरा करके वापीस अपने शहर राजकोट जा रहे थे। साथ में उनका एक दोस्त भी था।

बीच रास्ते में हेमु भाई ने बस कंडक्टर को बोला कि- “भैया, आगे ढसा के पास जो गांव है, वहां पर बस को रोक देना।”

यह बात सुनकर उनके दोस्त ने पूछा- “वहाँ पर आपको क्या काम है?”

हेमु भाई ने बताया कि “वहां पर मेरी एक बहन है, उससे मिलने मुझे जाना है।”

वह दोस्त उनका करीबी दोस्त था, इसलिए वह सोच में पड़ गया कि वहाँ पर तो उनकी कोई सगी बहन नही है, शायद दूर की रिश्तेदार होगी। अब तो वहां जा कर ही मालूम पड़ेगा कि कौन है वह दूर की रिश्तेदार।

फिर वह गांव आते ही कंडक्टर ने आवाज लगाई, दोनों दोस्त बस से नीचे उतर गये। और गांव की तरफ अपना रास्ता नापने लगे।

गांव पहुच कर वहां बाहर नीम के पेड़ के नीचे बैठे बुजुर्गो से पूछा कि “भैया, धनिबेन का घर किस तरफ है?

एक बुजुर्ग ने उनसे पूछा “कि तुम कौन हो?” इसके जवाब में हेमु भाई ने कहा कि “मैं उनका दूर का रिश्तेदार हूँ।”

फिर उस बुजुर्ग ने बोला कि ठीक है,और पास में ही खेल रहे बच्चों में से एक को आवाज लगा कर उससे बोले कि, “बेटा जरा इन महमानों को धनिबेन का घर दिखा कर आओ।”

फिर वह लड़का हेमु भाई और उनके दोस्त को उसके पीछे पीछे आने का बोल कर धनिबेन के घर की और चल पड़ा।

गांव के अंदर थोड़ा सा आगे चलकरऔर फिर एक तुटे हुए दरवाजे के पास आकर लड़का बोला कि “यही धनिबेन का घर है।” और वह वापिस अपने दोस्तों के साथ खेलने के लिये चला गया।

दोनों दोस्त घर के अंदर चले गये। और आंगन में पढ़ाई करते हुए बच्चे से पूछा कि “बेटा, तुम्हारी माँ कहाँ हैं?”

बच्चे ने कहा- “अंदर रसोई में खाना बना रही है।”

और फिर अपनी माँ को आवाज लगाई ” माँ, जरा बाहर आना, कोई मेहमान आये है।’

थोड़ी ही देर में अंदर से एक औरत बाहर आई।

औरत:जी, आप कौन?

हेमु भाई: मैं हेमु गढवी

धनिबेन ने यह सुनकर उनको खुशी-खुशी अंदर बुलाया। और उन्हें चाय बनाकर पिलायी।

फिर कुछ देर तक इधर उधर की बातें करने के बाद हेमु भाई हेमु भाई वापिस जाने के लिये उठे; और अपनी जेब में से पांच सौ रुपये निकाल कर उस धनिबेन को दिये। और बोले- “लो बहन, अभी के लिये सिर्फ इतने का ही इंतजाम कर सका हूं, पर और ज्यादा पैसा की व्यवस्था हो जाने पर बाद में फिर आऊंगा।”

धनिबेन ने पहले तो पैसे लेने से मना किया पर हेमु भाई के दबाव देने पर पैसे स्वीकार किये।

हेमु भाई का दोस्त बिना कुछ बोले यह सबकुछ देखते रहा। उसके मन में कुछ सवाल तो जरूर थे पर शायद वह सही समय का इंतजार कर रहा था।

फिर जैसे ही वें दोनों गांव से बाहर निकले, तब जाकर उस दोस्त ने हेमुभाई से बोला “आपकी इस बहन को तो मैं नहीं जानता।”

हेमु भाई ने मुस्कुराते हुए इसका जवाब दिया- “मैं भी नहीं जानता।”

यह सुनकर उनके दोस्त को थोडा झटका लगा, फिर उसने हेमु भाई से पूछा: “तो फिर आपने उतने सारे पैसे क्यों उनको दिये?

जिसके जवाब ने हेमु भाई ने कहा:

“तो बात यह है कि, आकाशवाणी राजकोट (रेडियो प्रोग्राम) पर मेरा प्रोग्राम सुनकर इस औरत के बच्चें अपनी माँ से पूछा करते थे…. माँ, यह रेडियो पर कौन गाना गा रहा है?

जिसके जवाब में धनिबेन कहती थी: बेटा, यह तुम्हारे हेमु मामा गा रहे है।”

फिर अचानक एक दिन आकाशवाणी के सरनामे पर मेरे नाम से एक पत्र आया, जिसमें टेढे-मेडे अक्षरों में लिखा था:

मेरे हेमु मामा को मालूम हो कि मेरे पिताजी का देहांत हो गया है, और मेरी माँ खेत में मजूरी कर के जो पैसा कमाती है उससे हमारे घर का खर्चा नहीं निकल रहा है। तो आप थोड़े पैसे भिजवा देना।”

“और वह पत्र मैंने पढ़ा, और उसके पीछे लिखे हुये सरनामे की मदद से यहां आ गया। और कल रात के प्रोग्राम के जो पैसे मिले थे वह उस औरत को दे दिये।”


रानी विक्टोरिया और फिंगर बॉउल की कहानी।

A short emotional story in hindi:

एक बार रानी विक्टोरिया लंदन में एक राजनयिक स्वागत समारोह में थी। और उस सम्मान के अतिथि एक अफ्रीकी नेता थे।

समारोह के भोजन के दौरान तो सब कुछ ठीक रहा, पर भोजन के अंत मे जब “फिंगर बॉउल” (finger bowl) परोसा गया, तब एक परेशानी सामने आई।

समारोह के मुख्य अतिथि ने अपनी जिंदगी में पहले कभी ब्रिटिश फिंगर बॉउल देखा नही था,और भोजन समारोह में बैठे किसी भी अध्यक्ष ने उस फिंगर बॉउल के उद्देश्य के बारे में पहले से उस नेता को बताने के बारे में नही सोचा था।

तो उनको लगा कि शायद वो बॉउल में पड़ा पानी पीने के लिए है, जो कि दरअसल हाथ धोने के लिए था।

तो उस महाशय ने फिंगर बॉउल को अपने दोनों हाथों से उठाया और मुँह के पास ले जा कर के गटागट आख़िरी बूंद तक पी गए।

एक पल के लिए सारे भोजन कक्ष में मुर्दे-घर जैसी चुप्पी छा गई। और फिर वहाँ बैठे अन्य मेहमानों ने एक-दूसरे के साथ फुसफुसा ना चालू कर दिया।

महारानी विक्टोरिया ने जैसे ही यह सब देखा तो पता है उन्होंने क्या किया???

उन्होंने बिना कुछ बोले अपने दोनों हाथों से अपना फिंगर बॉउल उठाया और मुह के पास ले जा कर के गटागट आख़िरी बूंद तक पी गई।

एक पल के बाद वहां बैठे 500 आश्चर्यचकित ब्रिटिश महिलाओं और सज्जनों ने भी एक साथ अपने स्वयं के फिंगर बॉउल को पी लीया।

दरअसल फिंगर बाउल के पानी को पीना वहाँ के नियमों के खिलाफ था, परन्तु उस दिन रानी विक्टोरिया ने अपने एक अतिथि की इज्जत रखने के लिये वह नियम तोड़ दिया।

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