An Emotional story in hindi

बस पाँच मिनट और पापा। आज सन्-डे हैं। Emotional stories in Hindi

बस पाँच मिनट और पापा। आज सन्-डे हैं।

Emotional stories in hindi

“माही, बेटा घर नही जाना है क्या आज?” घड़ी को देखते हुए राजीव ने अपनी बेटी से पूछा।

“बस पांच मिनट और। पापा प्लीज़, आज सन्-डे हैं।” माही ने अनुरोध किया।

“ठीक है, पर सिर्फ पांच मिनट।” राजीव ने मुस्कुराते हुए कहा।

और फिर से बेंच पर बैठकर अपनी बेटी को झूला झूलते देखने लगा। 5 मिनट बीत गए और राजीव खड़ा हो गया, और फिर से अपनी बेटी को बुलाया। “5 मिनट पूरे हो गए, अब चले?”

“पांच मिनट और पापा। सिर्फ पांच मिनट।” माही ने फिर से अनुरोध किया। राजीव मुस्कुराया और कहा, “ठीक है।”

“वैसे यह पिछले पौने घंटे से चल रहा है।” पास ही की बेंच में बैठी अनजान महिला ने राजीव से कहा। “क्या आपको नहीं लगता की इतना लाड-प्यार आपकी बेटी को बिगाड़ देगा?”

राजीव मुस्कुराया और कहा,

“पिछले साल, एक कार एक्सीडेंट में मेरा बड़ा बेटा मर गया। वह इस पार्क से घर लौट रहा था। काश उस वक़्त में उसके साथ होता। मैंने कभी उसके साथ ज्यादा समय नहीं बिताया लेकिन अब मैं उसके साथ सिर्फ पांच मिनट बिताने के लिए कुछ भी दे दूँगा।

उस हादसे के बाद मैंने अपने आप से एक वादा किया है, की मैं किसी भी हालात में उस गलती को दोबारा नही करूँगा।

आपको को लगता होगा कि खेलने के लिए वह मुझसे पांच मिनट ले रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि उसे खेलते हुए देखने के लिए मैं उससे पांच मिनट ले रहा हूँ।”

गुड़िया की गुडबाय किस।

Father and daughter heart touching story in hindi

कार्तिक को मीटिंग के लिए देर हो रही हैं, उसने जल्दी जल्दी अपना कोट कंधे पे डाला, और घर से बाहर निकला। जैसे ही वह अपनी गाड़ी में बैठा, उसी समय गुड़िया सीढ़ियों से दौड़ती हुई नीचे आई। वह चिल्लाई, “रुको, रुको”, लेकिन तब तक तो वह निकल चुका था।

उसका मुंह कुचले हुए चॉकलेट रैपर जैसा हो गया।

“वह मुझे गुडबाय किस देना भूल गए।” गुड़िया अपने दर्द को दबाते हुए धीरे से फुसफुसाई। वह फौरन टेलीफ़ोन के पास गई और पापा को कॉल लगाया। आरोप लगाते हुए उसने कहा-

“पापा आप मुझे गुडबाय किस दिए बिना ही चले गए।”

“ओह आ’म सॉरी, स्वीटहार्ट!” कार्तिक की आवाज़ में पश्चाताप था। “ठीक है।” उसने बड़ो की तरह बात करते हुए कहा और फोन काट दिया।

फिर बे-दिल हो कर नाश्ता किया, अपने जूते पहने, और स्कूल बैग उठाई। लेकिन जैसे ही वह दरवाज़े से बाहर निकली, तो उसने पापा की चमचमाती हुई कार को अपनी नज़रों के सामने पाया।

कार्तिक गाड़ी से बाहर निकला। गुड़िया फौरन उसकी की ओर भागी, उसका पूरा चेहरा क्रिसमस पेड़ की तरह चमकने लगा। कार्तिक ने उसे अपने दोनों हाथों से उठा लिया और गले लगाया।

गुड़िया के गाल को चूमकर कार्तिक बोला “मुझे खेद है कि मैं भूल गया।” गुड़िया कुछ भी नही बोली। लेकिन उसके चेहरे पर एक कभी न खत्म होने वाली स्माइल थी।

पंद्रह साल बाद, किसी को भी याद नहीं होगा कि कार्तिक एक बार एक मीटिंग में लेट पहुँचा था, लेकिन गुड़िया कभी भी इस बात को नही भूल पाएगी की उसके पिता उसे गुडबाय किस देने के लिए बीच रास्ते से लौटकर घर वापिस आए थे!

Moral of the story:

आपके बच्चों को केवल एक ही बचपन मिलता है। इसे यादगार बनाइए।

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