Chidiya ki kahani

एक मासूम सी चिड़िया की भयानक कहानी। (chidiya ki kahani)

एक मासूम सी चिड़िया की भयानक कहानी। chidiya ki kahani

ठंड़ी का मौसम था, और ठंड़ बहोत ही ज्यादा थी।

एक शहर के किसी छोटे से पार्क में नीम के पेड़ के ऊपर एक छोटी सी चिड़िया बैठी थी।

परेशानी यह थी कि उसको ठंड इतनी ज्यादा लग गई थी की मानो ‘हाइपोथर्मिया‘ हो गया हो।

अचानक ही उसकी सांसे रुक गई और वो पेड़ से नीचे गिर गई।

उसका दिल बंध पड़ने ही वाला था कि अचानक वहा से एक भैंस उसके ऊपर से गुजरी, और जाते वक्त उसके ऊपर पर गोबर डाल कर चली गई।

अब गोबर की गर्मी की वजह से चिड़िया के शरीर को भी गरमी मिली, और चिड़िया की जान में जान आ गई।

जब चिड़िया को यह महसूस हुआ कि वो जिंदा बच गई है तो वो खुशी से फूली न समाई और…

उसने गोबर में से अपना मुंह बाहर निकला और आसमान की तरफ देख कर गाना गाने लगी….

गाना कौन सा?

“चल छैया छैया छैया, चल छैया छैया छैया,छैया”

फिर उसे लगा कि अब उसे वहा से बाहर निकलना चाहिए, तो उसने पंख फड़फड़ा कर बाहर निकलने की कोशिश की,

पर पंख में गोबर फस गया था, जिसकी वजह से वो उड़ नही पाई, आ गई ना मुसीबत!

चिड़िया ने हार माने बिना दुबारा कोशिश की पर नतीजा कुछ न निकला।

फिर उसने किसी की मदद लेने की सोची, और आवाज लगाई…

“बचाओ, कोई सुन रहा है क्या मुझे? मेरी मदद करो।”

उसी बीच बाजू के मंदिर से एक प्यारी सी दिखने वाली बिल्ली बाहर निकली, और किस्मत से उसे वो चिड़िया की आवाज़ सुनाई दी।

बिल्ली ने सोचा की चलो देख कर आती हूं की मामला क्या है?

फिर बिल्ली ने पार्क में जाकर देखा तो उसे गोबर में से चिड़िया की आवाज आती सुनाई दी।

बिल्ली गोबर के पास गई, से गोबर में से चिड़िया का मुँह दिखाई दिया।

चिड़िया का भोला सा मुँह देख कर बिल्ली को दया आ गई,और उसने अपने हाथों से चिड़िया को बड़े प्यार से बाहर निकाला और साफ किया।

और फिर साफ करने के बाद वो उस चिड़िया को खा गई।

और यहाँ पर हमारी कहानी पूरी हो गई।


कहानी से सबक:

पर दोस्तो, अगर हम उस गोबर को अपनी जिंदगी में आने वाली समस्या समज ले तो इस कहानी से 3 सबक सीखने को मिलते है-

सबक no. 1

कोई आप के ऊपर गोबर फैंकता है तो जरूरी नही की वह आपका दुश्मन हो।


सबक no. 2

कोई आप को गोबर से बाहर निकालता है तो जरूरी नही की वह आपका दोस्त हो।


सबक no. 3

जब भी कभी आप अपने आप को गोबर से घिरा हुआ महसूस करें …..

” तो कृपया अपना मुंह बंध रखें। “


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