कर और आइसक्रीम की दिलचस्प कहानी

कार और आइसक्रीम की दुश्मनी। Dilchasp kahani

कार और आइसक्रीम की दुश्मनी।

Dilchasp kahani

एक दिन एक कार बनाती हुई कंपनी के मालिक को एक email आया, जिसमें लिखा था-

“यह email मैं आपको दूसरी बार भेज रही हूं, क्योंकि पहली बार आपने कोई reply नहीं दिया था। और reply ना देने के लिये मैं आपको दोषी नहीं मानती। क्योंकि मेरी problem ही ऐसी है कि उस पर शायद कोई भी यकीन नहीं करेगा।

लेकिन यह बिल्कुल सच है, की आपकी कंपनी की ली हुई मेरी नई गाड़ी को चॉकलेट आइस्क्रीम से एलर्जी है। मैं आपको विस्तार से बताती हूं-”

“हमारे परिवार में एक परंपरा है, हम हर रात को खाना खाने के बाद ice cream खाते है।

मेरी समस्या यह है कि जब भी मैं चॉकलेट आइसक्रीम लेने के लिए नजदीकी आइसक्रीम पार्लर में जाती हूं तो वापस आते समय मेरी गाड़ी start नहीं होती।”

अगर और कोई भी दूसरे फ्लेवर की आइसक्रीम खरीदूं तो कोई दिक्कत नहीं होती बस चॉकलेट आइसक्रीम से ही प्रॉब्लम होती है।”

महिला की कहानी पढ़कर पहले तो कंपनी के मालिक को इस औरत की दिमागी हालत पर संदेह हुआ, फिर बार बार email आता देख कर उसे kahani थोड़ी dilchasp लगी। इसलिए उसने एक सर्विस इंजीनियर को इस रोचक समस्या को सुलजाने के लिए भेज दिया।

इंजीनियर शाम को उस औरत के घर पे गया, तो उसे देख कर हैरानी हुई, क्योंकि उस घर में सभी लोग पढे-लिखे दिखते थे।

फिर वह उस औरत के साथ कार में बैठा और वे दोनों आइसक्रीम शॉप की और चल दिये।

और किस्मत से आज चॉकलेट आइसक्रीम की बारी थी। आइसक्रीम शॉप तक तो सब कुछ ठीक रहा, परंतु वापस आते समय ठीक वैसा ही हुआ जैसा कि उस औरत ने कहा था, गाड़ी start नही हुई।

फिर अगली रात भी इंजीनियर उस औरत के साथ आइसक्रीम पार्लर गया, इस बार स्ट्राबेरी की बारी थी। पर वापस आते समय गाड़ी बड़े आराम से चालू हो गई।

फिर तीसरी और चौथी रात में भी इंजीनियर उस औरत के साथ गया। इस बार mango और वैनिला की बारी थी, पर इस दोनों बार भी गाड़ी में कोई प्रॉब्लम नहीं आयी।

फिर पांचवे दिन वापिस चॉक्लेट की बारी थी, और इस बार भी पहले दिन की तरह वापस आते समय गाड़ी start नहीं हुई।

इंजीनियर इस बात को जान कर हैरान हुआ।

अब इंजीनियर, एक तार्किक व्यक्ति होने के नाते, उसने इस बात को मानने से इनकार कर दिया कि उस औरत की कार को चॉक्लेट आइसक्रीम से एलर्जी थी।

इसलिए, उसने तय किया कि जब तक वो इस dilchasp समस्या को हल नहीं कर देता तब तक वह उस औरत के साथ हर रात आइसक्रीम लेने जाया करेगा। और उसने अब नोट्स लेना शुरू कर दिया: उसने सभी प्रकार के डेटा, दिन का समय, इस्तेमाल गैस का प्रकार, जाने का और वापिस आने में कितना समय लगता है वगैरह।

फिर उसने उस पांच दिनों के दौरान इकठ्ठा किये डाटा का विश्लेषण करना शुरू किया।

और जल्द ही उसे एक सुराग मिल गया- उस औरत ने किसी भी अन्य फ्लेवर की तुलना में चॉक्लेट फ्लेवर खरीदने के लिए कम समय लिया। पर क्यूं ? जवाब उस पार्लर की बनावट में था।

चॉकलेट फ्लेवर उस पार्लर का सबसे मशहूर फ्लेवर था। तो इस लिए पार्लर वाले चॉक्लेट फ्लेवर की आइसक्रीम को अलग से रखते थे, ताकि उसे निकालने में ज्यादा समय न लगे।

एक बात तो तय थी कि कम समय समस्या था ना कि चॉक्लेट आइसक्रीम।

अब इंजीनियर के लिए सवाल यह था कि कार कम समय लेने पर क्यों शुरू नहीं होती है?

– इंजीनियर को जल्द ही जवाब मिल गया। जवाब था- vapour lock

वास्तव में यह समस्या हर रात को होती थी,लेकिन अन्य फ्लेवर खरीदने के लिए लगता अतिरिक्त समय इंजन को शुरू करने के लिए पर्याप्त ठंडा कर देता था। पर जब औरत चॉक्लेट फ्लेवर लाती थी, तो vapour बंद करने के लिए vapour lock अभी भी बहुत गर्म होता था।

फिर उसने vapour lock को बदल दिया और गाड़ी की स्टार्ट न होने की समस्या भी बंद हो गयी।

तो दोस्तों इस दिलचस्प कहानी से दो सबक मिलते है।

कहानी से सबक नंब1.

कभी कभी पागल जैसी लगने वाली समस्याएं भी वास्तविक होती हैं।


कहानी से सबक नंब2.

कभी कभी जो दिखता है वह होता नहीं।

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