Brahma ji ki kahani

जब ब्रह्मा जी ने किया माँ का निर्माण। Brahma ji ki kahani

एक माँ और उसके बच्चे के बीच का रिश्ता दुनिया का एकमात्र वास्तविक और शुद्धतम रिश्ता है।

एक पिता के पास एक बुरा पिता हो सकता है लेकिन एक माँ के पास कभी भी बुरी माँ नहीं हो सकती क्योंकि माँ कभी भी बुरी हो ही नही सकती।

माँ और उसके दिव्य प्रेम पर कई बातें लिखी गई हैं, लेकिन ‘माँ’ का वर्णन करने के लिए हमेशा शब्द कम पड़ जाते हैं। आज HindiMonk पर मैं “माँ” पर लिखी एक कहानी आपसे शेयर कर रहा हूँ जो मेरे दिल को छू गई।

जब ब्रह्मा जी ने किया माँ का निर्माण। Brahma ji ki kahani

युगों पुरानी बात हैं, ब्रह्मा जी इस वक़्त माँ का निर्माण करने में इतने व्यस्त है कि उन्हें समय की सुधबुध बिल्कुल नही हैं।

छठे दिन पर सरस्वती जी को उनकी चिंता होने लगी, इसलिए वह ब्रह्मा जी के पास गई और उनसे पूछा “प्रभु, आप इस जीव को बनाने में इतना समय क्यों खर्च कर रहे हैं?”

ब्रह्मा जी ने उत्तर दिया,

“क्या आपने इस जीव का विवरण पढ़ा हैं?

उसके शरीर में 206 हड्डियाँ होनी चाहिए, जरूरत पड़ने पर सिर्फ एक रोटी और एक गिलास पानी से उसका पेट भर जाना चाहिए। उसके पास एक ऐसी गोद होनी चाहिए जिसमें एक ही समय पर तीन बच्चें समा सकें, और जब वह खड़ी हो तो गायब हो जाए।

उसका एक स्पर्श घूँटनो की खरोंच से लेकर टूटे हुए दिल तक को ठीक कर सकना चाहिए; और उसके पास छह जोड़ी हाथ भी होने चाहिए।”

सरस्वती जी इस एक जीव के लिए इतनी सारी आवश्यकताओं को सुनकर चकित हो कर बोली, “छह जोड़ी हाथ! यह तो बहुत मुश्किल हैं।”

ब्रह्मा जी ने उत्तर दिया, “ओह, यह हाथ नहीं हैं जो समस्या है। यह तीन जोड़ी आँखें हैं जो हर माँ के पास होनी चाहिए!”

“तीन जोड़ी आँखें? उसकी क्या आवश्यकता हैं?” सरस्वती जी ने कुतूहलता से पूछा।

भगवान ने समझाते हुए कहा,

“हां, एक जोड़ी आँखें उसके मस्तिष्क के अंदर, यह जानने के लिए कि उसके बच्चें हर समय क्या कर रहे हैं।

दूसरी जोड़ी उसके सिर के पीछे, जिसकी मदद से वह अपने बच्चों की हर ज़रूरतों को बच्चों द्वारा बताए जाने से पहले ही जान लेगी।

और तीसरी जोड़ी यहां उसके सिर के सामने, अपने नाराज़ हुए बच्चे के दिल की बात समझने के लिए और बिना एक शब्द को बोले यह कहने के लिए की वह उसे समझती है और प्यार करती हैं।

“प्रभु, मुझे लगता है कि आज आपने बहुत ज्यादा काम किया हैं, अब थोड़ा सा आराम कर लीजिए। बाकी का काम कल खत्म कर लेना।” सरस्वती जी ने चिंता जताते हुए बिनती की।

“नहीं, मैं अभी नहीं रुक सकता!” ब्रह्मा जी ने एतराज किया, “मैं इस सृजन को खत्म करने के बहुत करीब हूं जो मेरे खुद के दिल के करीब है।”

सरस्वती जी माँ के पास गई और उसके शरीर को छुआ, “लेकिन, आपने इसे बहुत ज्यादा कोमल बना दिया है, भगवान। यह इतना सबकुछ कैसे झेल पाएगी?”

ब्रह्मा जी ने अपना सिर समहमति में हिलाते हुए कहा, “ठीक कहा आपने देवी, वह वाकई में बहुत कोमल है, लेकिन मैंने उसे कठिन भी बनाया है। आपको पता नहीं है कि वह क्या क्या सहन कर सकती है या पूरा कर सकती है।

वह जब बीमार होगी तो अपने आप ही खुद को ठीक करने की क्षमता रखती हैं। वह नौ साल के रूठे हुए बच्चें को भी नहाने के लिए तैयार कर सकती हैं।

वह छह लोगों के परिवार को अकेले संभाल सकती है। और तो और वह बदले में कुछ भी पाने की अपेक्षा न करते हुए हर किसी की ज़रूरतों का ख्याल रखेगी। पूरी कायनात उसे निस्वार्थ प्रेम का जीता जागता सबूत मानेगी।”

“लेकिन क्या इस जीव में सोचने की क्षमता होगी?” सरस्वति जी ने पूछा।

ब्रह्मा जी ने उत्तर दिया, “न केवल वह सोचने में सक्षम होगी, बल्कि वह तर्क करने में और बातचीत करने में भी सक्षम होगी। वह हर झूठ को पकड़ लेगी और कोई भी उसके सामने सच नहीं छिपा पाएगा।”

सरस्वती ने जीव के शरीर की ओर गौर से देखा और उसके गाल को छू कर कहा, “ओह, ऐसा लगता है कि आपकी इस सुंदर रचना के शरीर में छेद है। देखो इसकी आंखों से पानी टपक रहा हैं। मैंने आपको बताया था ना कि आप इतने नाज़ुक शरीर में बहुत अधिक विशेषताएँ डालने की कोशिश कर रहे हैं।”

“यह पानी नहीं हैं।” ब्रह्मा जी ने प्रत्युत्तर देते हुए कहा, “यह आँसू है!”

“आँसू? वो किस लिए?” सरस्वती जी ने पूछा।

ब्रह्मा जी ने कहा, “आँसू उसके आनंद, उसके दुःख, उसकी निराशा, उसके दर्द, उसके अकेलेपन, उसके शोक और गर्व को व्यक्त करने का माध्यम है।”

सरस्वती जी प्रभावित होकर बोली, “आप वाकई में एक प्रतिभाशाली व्यक्ति हैं, प्रभु। आपने इस एक जीव के लिए न सिर्फ इतना सब कुछ सोचा बल्कि आपने आँसू भी बनाए!”

ब्रह्मा जी ने सरस्वती जी की ओर देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “मुझे डर है कि आप फिर से गलत हैं। मैंने महिला को बनाया, लेकिन आँसू उसने पैदा किए!”

The End…

इस ब्रह्मांड में केवल माँ ही है जिसने अपनी संतानों का साथ कभी नहीं छोड़ा है चाहे उसका बच्चा विकलांग हो, अपराधी हो या उसका अनादर करता हो।

माँ वह है जो बिना वेतन के परिवार के लिए पूरी जिंदगी काम करती है, वह केवल एक है जो अपने बच्चे के लिए अपना सब कुछ दे सकती है।

अपनी माँ के बलिदानों का सम्मान करें। सब कुछ फिर से हासिल किया जा सकता है लेकिन एक बार माँ चली गई तो वह कभी नहीं आएगी।

माँ का जन्म सिर्फ प्यार करने के लिए और प्यार पाने के लिए हुआ है। अपनी माँ से प्यार करें।

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