Hindi story with moral lesson

फुटबॉल की गेंद में छुपा खुशी का रह्स्य। Best hindi moral story

फुटबॉल की गेंद में छुपा खुशी का रह्स्य।

Best hindi moral story on happiness.

तो बात यह थी की एक बड़े से शहर में एक छोटा सा स्कूल था। उस स्कूल में एक बहुत ही खूबसूरत टीचर हुआ करती थी जिसका नाम था पल्लवी।

तो एक दिन पल्लवी मेडम ने सोचा कि आज उसे अपने छात्रों को गणित के sin theta/cos theta नहीं सिखाने है, क्योंकि यह सब तो वैसे भी आगे जाकर उनको काम में आने वाला तो है नही।

“तो फिर इसके बदलें मे आज क्या सिखाया जाए?” उसके मन में सवाल आया।

पर क्योंकि जहाँ सवाल होता है, वहाँ जवाब भी होता है, इसलिए एक छोटे से brain storming के बाद पल्लवी को भी अपने सवाल का जवाब मिल गया।

उसने ठान लिया कि आज उसे अपने विद्यार्थियों को “खुश रहने के रहस्य” के बारे में सीखना है। और इसके लिये उसने एक idea भी सोच लिया कि कैसे सिखाया जाये।

तो जब पल्लवी की क्लास शुरू हुई तो उसने अपने बच्चों से कह दिया कि “मेरे प्यारे बच्चों, आज हम गणित-वनीत के पाठ नहीं पढ़ेंगे, बल्कि इसकी जगह आज हम एक गेम खेलेंगे।

यह सुनकर क्लास के सारे बच्चों में खुशी की लहर सी दौड़ गयी। क्योंकि उस स्कूल में तो PT के पीरियड में भी गणित की क्लास चलती थी।

पर आज तो बच्चें गणित के पीरियड में गेम खेलने वाले थे। ये हुई ना बात।

तो गेम खेलने की शुरुआत हुई, सारे बच्चों को एक-एक फुटबॉल दिया गया। और सभी को उस फुटबॉल पर परमानैंट मार्कर से अपना-अपना नाम लिखने का एलान किया गया।

अब नाम लिखने के बाद, सभी से एक दूसरे के फुटबॉल के साथ खेलने को कहा गया।

बच्चें बड़े ही आनंदित हो कर फुटबॉल से खेलने लगे। बल्कि ऐसे जोर-जोर से किक मारने लगे कि मानो रोनाल्डो की छट्ठी औलाद हो।

फिर आधे घंटे बाद गेम को रोका गया, और सबको एक नया टास्क दिया गया, उस फुटबॉल को खोजने का टास्क – कि जिस पर उनका नाम लिखा था। और इसके लिये सबकों 15 मिनट का वक़्त दिया गया।

सभी बच्चें 15 मिनट तक पूरे मैदान में अपना अपना बॉल खोजते रहे पर किसी को अपना बॉल नहीं मिला।

15 मिनट पूरी हो जाने के बाद पल्लवी ने उनको एक छोटा सा उपाय बताया,

उसने सभी बच्चों को कोई भी एक बॉल उठाकर, उस पर जिसका भी नाम लिखा हो उसे वह बॉल वापिस लौटाने को कहा।

इस तरह से सिर्फ 5 मिनट में ही सभी बच्चों को अपना अपना बॉल मिल गया।

फिर पल्लवी ने विद्यार्थियों से कहा-

“My dear students,

हमारी जिंदगी मैं भी ऐसा ही कुछ होता है। हम सब जिंदगी भर अपनी अपनी खुशी को खोजते फिरते है, पर कभी मिलती नही है।

दरअसल, हमारी खुशी अन्य लोगों की खुशी में निहित है। अगर आप उन्हें उनकी खुशी लौटा देंगें; तो आपको भी अपनी खुशी मिल जाएगी। और यही मानव जीवन का उद्देश्य है … “

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5 Comments

  1. आपके इस लेख को पढ़ कर बचपन के दिन याद आ गए, बहुत-बहुत शुक्रिया इस लेख को पोस्ट करने के लिए।

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