Moral stories in hindi.

अठ्ठनी को छोड़ दें, और आज़ाद बन जाए। 5 New moral stories in hindi

5 New moral stories in hindi

हम सब बचपन से ही panchtantra,Aesop’s Fables, akbar-birbal जैसी short moral stories पढ़ते आ रहे हैं। और इस दुनिया में शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसे नैतिक कहानियां/moral stories पढ़ना पसंद नहीं होगा।

Moral stories का हम सब के जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव होता हैं। यह सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है, कहानियां हमें जिम्मेदार इंसान भी बनाती हैं।

इसीलिए आज मैं Hindi Monk पर प्रस्तुत कर रहा हूँ 5 moral stories for children in hindi. ये पांच नैतिक कहानियां हमें जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाती हैं। हमें motivate करती है एक बेहतर इंसान बनने के लिए।

New Moral stories in hindi for class – 9

अठन्नी को छोड़ दें। Prernadayak Hindi Kahani

आज एक बार फिर आयु ने मुसीबत खड़ी कर दी हैं।

ड्राइंग रूम के सेंटर टेबल के ऊपर पड़े फूल-दान से खेलते – खेलते उसने अपना हाथ फूल-दान के अंदर फंसा दिया।

आयु ने अपना हाथ बाहर निकालने की बहुत कोशिश की, पर निकाल नहीं पाया।

गभराया हुआ आयु फूल-दान लेकर अपने पापा रनवीर के पास गया। क्योंकि मम्मी के पास जाना मतलब ‛आ बैल मुझे मार।’

पापा रनवीर ने भी अपनी पूरी कोशिश की, लेकिन सारी कोशिश नाकाम रही।

रनवीर को अब लगने लगा कि शायद इस फूल-दान को आज तोड़ना ही पड़ेगा। तोड़ने से पहले उसके मन में एक आख़िरी कोशिश करने का ख्याल आया। उसने आयु से कहा-

‛ मेरे बेटे, एक और आख़िरी कोशिश करो।

अपना हाथ खोलो और अपनी उंगलियों को सीधा करों, फिर धीरे धीरे हाथ को बाहर की तरफ खींचो। ’

आयु ने अपनी आँखें बंद की और फिर से एक बार कोशिश की जैसे कि उसके पिता ने बताया था।

आयु ने कहा ‛ नहीं, मैं ऐसा नहीं कर सकता।’

सुनकर रनवीर को आश्चर्य हुआ। उसने अपने बेटे से पूछा ‛पर क्यों?’

‛क्योंकि अगर मैं अपनी उंगलियां सीधी करूँगा तो मेरे हाथ से अठन्नी गिर जाएगी।’

Moral of the story
हम अपनी मुट्ठी में उस अठन्नी रूपी बेकार सी चिंताओं को पकड़ कर रखने मैं इतने व्यस्त है कि हम उस ख़ुशी को स्वीकार ही नहीं कर पा रहे हैं जो कि उस अठन्नी की तुलना में बहुत ज्यादा कीमती हैं।

अठ्ठनी को छोड़ दें, और आज़ाद बन जाए।

New Moral stories in hindi for class- 8

Just Do It | Hindi motivational story on fear

‛यह खिलौना किसे चाहिए? ’ अध्यापिका ने अपना हाथ ऊपर उठा कर अपनी चौथी कक्षा के छात्रों से पूछा।

उसके हाथ में एक प्यारा सा घोड़ा था।

खिलौने को देख कर बच्चों की आंखों में चमक सी आ गई।

खिलौने की तरफ ललचाई हुई नजरों से देखते हुए सभी बच्चों ने अपना अपना हाथ ऊपर किया और उम्मीद करने लगे कि काश वह घोड़ा उनको मिल जाए।

तभी एक बच्ची दौड़ कर अध्यापिका के पास जा पहुँची और लपक कर खिलौने को छीन लिया। घोड़े को लेकर वह वापिस अपनी जगह जा कर बैठ गई।

अध्यापिका ने बच्ची को शाबाशी दी। और फिर छात्रों की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए कहा –

‛इस बात को हमेशा याद रखें, ख़्वाहिशें सिर्फ उन लोगों की पूरी होती हैं, जो खुद उठ कर उन्हें पूरी करते है। सिर्फ हाथ ऊपर करने से सपनें सच नहीं हो जाते। ’

Moral of the story:
हमारे जीवन में भी ऐसा ही होता है। हम सबको चारों और अवसर दिखाई देते है। हम सब उन्हें पाना भी चाहते है। पर उन्हें पाने के लिए हम कुछ करते नहीं हैं।

हम उस खिलौने की तरफ हसरत भरी निगाह से देखते रहते हैं। और प्रार्थना करते रहते है कि कोई उसे हमें दे दें। पर कभी खड़े हो कर उसे पाने का साहस नहीं करते हैं।

हम में से कुछ लोग खड़े हो कर उस खिलौने को लपक लेने के बारे में सोचते भी है, पर ऐसा करते नहीं है। क्योंकि हमें इस बात की चिंता होने लगती है कि लोग क्या सोचेंगे?

पर असल में वह खिलौना उसी को मिलता है जो दूसरों की परवाह किए बिना उसे पाने का उद्यम करता है।

New Moral stories in hindi for class – 10

भिखारी और टिन का डिब्बा |हिंदी मोरल स्टोरी

एक भिखारी था। जो एक मंदिर के पास नीम के पेड़ के नीचे बैठ कर रास्ते पर आते-जाते लोगों से भीख मांगता था।

एक दीन एक साधु वहाँ से गुर रहे थे। उन्हें देख कर भिखारी चिल्लाया “ भगवान के नाम पे कुछ दे दो बाबा। ”

साधु ने कहा “ माफ़ करना, पर तुम्हें देने के लिए मेरे पास कुछ भी नहीं है। ”

फिर साधु ने भिखारी से पूछा – उस अजीब से डिब्बे मैं क्या हैं, जिसके ऊपर तुम बैठे हों?

भिखारी ने जवाब दिया – “ कुछ भी नहीं होगा , यह तो बस एक पुराना टिन का डिब्बा है। जो कि मुझे बहुत सालों पहले मंदिर के पिछे वाले हिस्से में पड़ा मिला था। ”

“ तो क्या तुमने कभी उसे खोलकर नहीं देखा?” साधु ने पूछा।

भिखारी ने कहा – “ नहीं, क्या फर्क पड़ता है? इस में कुछ भी नहीं है। ”

“ खोलकर देखने में क्या जाता हैं? एक बार देख तो लो। ” साधु ने आग्रह किया।

भिखारी खड़ा हुआ, और उस डिब्बे को खोला।

डिब्बे के अंदर देख कर उसे अपने आप पर विश्वास ही नहीं हुआ।

उसने देखा कि डिब्बा सोने-झवेरात से भरा हुआ हैं। वह वर्षों से उस के ऊपर बैठता था, पर कभी जान ही नहीं पाया।

Moral of the story:
हममें से कई लोग खुशी को, प्यार को बाहर खोज रहे हैं। अपने अंदर झांके।

आप जिस सुख – शांति और संतुष्टि की खोज कर रहे हैं, वह आप के अंतर-भाग में आपका इंतजार कर रहीं हैं।

आप किस ख़ज़ाने पर बैठे हैं?

और इसे खोलने के लिए आप किसका इंतजार कर रहे हैं?

मैं आपको अपने अंदर झांकने के लिए आमंत्रित करता हूं।

New Moral stories in hindi for class – 10

बँटवारा – Think Outside the Box

A short Hindi story with lesson:

“ सबसे बड़े बेटे को आधा (1/2) हिस्सा मिले।

दूसरे बेटे को एक तिहाई (1/3) हिस्सा मिले।

और सबसे छोटे बेटे को 1/9 वां हिस्सा दिया जाना चाहिए। ”

यहीं शब्द बोले थे हरिलाल ने मरने से पहले।

अब समस्या ये हुई कि श्री-मान हरिलाल जी संपत्ति के तौर पर 17 ऊंट छोड़ कर गए थे।

अब कोई 17 ऊंट को 2 या 3 या फिर 9 से कैसे विभाजित करें भला?

माँ ने तो बहुत समज़ाया पर तीनों भाइयों में से किसीने एक भी न सुनी। और अपनी-अपनी जायदाद के लिए लड़ने कोर्ट चले गए।

लड़ते-लड़ते साल भर निकल गया। पर कोर्ट में आज तक किसी को फ़ैसला मिला हैं क्या ?

इसीलिए तीनों ने मिलकर एक फ़ैसला किया। गांव के सरपंच बिरजू महाराज के पास जाने का। पूरे राज्य में बिरजू के चतुराई के किस्से मशहूर थे। सरपंच न हुआ मानो बीरबल हो गया नए जमाने का।

मंगलवार की शाम को तीनों भाई 17 ऊंट को साथ लेकर बिरजू महाराज के घर पहुंचे। तीनों का स्वागत किया गया। बिरजू ने तो पहले से ही समस्या सुनी हुई थी।

घर के आँगन में बैठ कर थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने के बाद बिरजू खड़ा हुआ। और खुद का अपना एक ऊंट ला कर और इसे 17 ऊँटो में जोड़ दिया। अब कुल 18 ऊंट हो गए।

अब, बिरजू ने हरिलाल के आख़िरी शब्दों के मुताबिक बँटवारा करना शुरू किया।

18 का आधा (1/2) = 9
तो उसने 9 ऊंट सबसे बड़े बेटे को दिए।

18 का एक तिहाई (1/3) = 6
तो उसने 6 ऊंट दूसरे बेटे को दिए।

18 का 1/9 = 2
तो उसने 2 ऊंट सबसे छोटे बेटे को दिए।

अब इसे जोड़े :
9 + 6 + 2 = 17

बाकी बचा एक ऊंट, जिसे बिरजू ने वापस ले लिया।

Moral of the story:
समझौता और समस्या को हल करने का दृष्टिकोण 18 वें ऊंट यानी पारस्परिक लाभ को ढूंढना है। एक बार जब कोई व्यक्ति पारस्परिक हित को ढूंढ लेता है, तो समस्या हल हो जाती है। यह कई बार मुश्किल होता है।

हालांकि, समाधान तक पहुंचने के लिए, पहला कदम यह मानना है कि एक समाधान है। अगर हमें लगता है कि कोई समाधान नहीं है, तो हम किसी भी समाधान तक पहुंचने में सक्षम नहीं होंगे!

New Moral stories in hindi for class – 7

The Magic of Forgiveness – Very short story in Hindi with value lesson

“आई एम सॉरी। हम आपके बेटे को नहीं बचा पाए। ” ICU से बाहर निकले डॉक्टर ने नर्मी के साथ कहा।

यह दो ही वाक्य काफी थे सुहाना को जिंदा लाश बनाने के लिए। आंखों में से तो पहले से ही आँसू बहना चालू थे। अब तो बोलने के लिए ना शब्द थे और ना ही चलने के लिए हिम्मत।

दुख तो होगा ना। शादी के ग्यारह साल बाद हुआ था बेटा। पता नहीं कितनी मन्नतें मांगी थी उसने।

बिना कुछ बोले दीवार के पास पड़े सीट पर बैठ गई। और अपने हसबंड रवि के आने का इंतजार करने लगी। फोन पर तो सब कुछ बता दिया था रवि को। रवि भी खबर सुनकर ऑफ़िस में बिना किसी को इन्फॉर्म किए सीधा अस्पताल के लिए निकल गया।

इस वक़्त सुहाना के मन में सिर्फ दो ही चीज़े थी। एक तो बेटा खोने का गम और दूसरी चिंता।

क्या मुँह दिखाएगी अपने पति को? कैसे करेगी उसका सामना?

वह अपने आप को कोस रही थी। अगर उसने सुबह बिना भूले चूहे मारने की दवाई को सही ठिकाने पर रख दी होती तो ना उसका बेटा दवाई के पास जा पाता और ना ही उसे पीता।

इतने में रवि भी आ पहुँचा। और सीधा अपने बेटे के पास चला गया। बेटे का मासूम चेहरा देखकर कुछ देर तक तो वह भी बे-जान सा बन गया।

फिर वह सुहाना के पास गया। और उसे गले लगा कर सिर्फ इतना कहा –

“ आई लव यु सो मच, सुहाना ”

बेटा तो अब मर चुका था। किसी भी तरह से उसे जिंदा नहीं किया जा सकता था। पत्नी की ग़लतियाँ बताने का और उस पर गुस्सा होने का कोई फायदा नही था।

माना कि अगर उसने बोतल को सही जगह रख दिया होता, तो उसका बेटा जिंदा होता। पर अब दोष दिखाने में कोई समझदारी नहीं हैं।

आखिरकार सुहाना ने भी तो अपना एकलौता बेटा खो दिया था। उस पल उसे अपने पति से जिस चीज की जरूरत थी वह थी सांत्वना और सहानुभूति। और रवि ने भी समझदारी दिखाते हुए वहीं किया।

Moral of the story:
हम सब भी दूसरों को उनकी ग़लतियों के लिए जिम्मेदार ठहराने में और दोष देने में अपना समय बर्बाद करते रहते है।

अक्सर हम उस स्नेह को हमारे हाथ से फिसलने देते है जो हमें एक दूसरें को सहारा देने से प्राप्त होता है।

क्या वाकई में उस इंसान को माफ़ करना इतना मुश्किल हैं, जिसे हम इस पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करते हैं?

आपके अंदर जो प्यार का ख़ज़ाना छिपा हैं उसे बाहर लाए। अपने दुःख और पीड़ा को बढ़ाना बंध करें। दूसरों को माफ़ करने की समझदारी दिखाए और आप पाएंगे कि चीज़े इतनी भी ज्यादा बुरी नहीं है जितनी कि आपने सोची थी।

Thanks for reading these 5 new moral stories in hindi.

क्या आपको लगता हैं कि अगर हर कोई जीवन को इस तरह के नजरिए से देखने लगें, तो दुनिया में समस्याऐं कम हो सकती हैं? Comment के द्वारा हमें जरूर बताए।

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